Naav Ki Keel Ka Challa Benefits : नीलम रत्न से ज्यादा असरदार

Naav Ki Keel Ka Challa Benefits : नीलम से ज्यादा असरदार हे नाव की कील

घोड़े की नाल की अंगूठी-Naav Ki Keel Ka Challa Benefits

शनिवार को घोड़े की नाल का छल्ला सिद्ध करना और इसका उपयोग  प्रभावी उपाय है naav ki keel ka challa benefits जो आपके जीवन में सुख, संपत्ति, और समृद्धि का स्रोत बन सकता है। इस अद्वितीय और प्राचीन उपाय से आप अपने व्यापार और जीवन को नई ऊँचाइयों तक पहुंचा सकते हैं।

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शनिदेव के दुष्प्रभावों से मुक्ति प्राप्त करने के लिए एक अद्वितीय और चमत्कारी उपाय है – घोड़े की नाल का छल्ला। इसे शनिवार को प्राप्त कर सिद्ध करके व्यापार और व्यापारिक स्थानों में इसका उपयोग करने से जीवन में सुख, संपत्ति, और समृद्धि की प्राप्ति होती है।

शनि के दुष्प्रभावों से बचने के लिए, लोग शनिवार को घोड़े की नाल का छल्ला सिद्ध करते हैं जिसे शनि का छल्ला कहा जाता है। इसे धारण करने से जीवन में सकारात्मक परिवर्तन होता है और बुरी आत्माओं से मुक्ति मिलती है।व्यापारिक प्रतिष्ठान को बढ़ावा देने के लिए, शनिवार को घोड़े की नाल को सिद्ध करना और उसे व्यवसाय में उपयोग करना हे । यह छल्ला व्यापार में समृद्धि और सफलता का सूत्र है, जिससे व्यापारी अपनी पहचान बना सकते हैं

लेकिन समस्या यह ये हे की ऑरिगनल घोड़े की नाल नहीं मिल सकता हे ,जो यहा वहा हर जगह 100 -200 -300  रुपये की घोड़े की नाल का छल्ला बेच रहे हे न ,सब  नॉर्मल लोहे का छल्ला हे , जिसका फायदे भी बहुत नॉर्मल हे , मतलब कोई फायदा नहीं हे , मे एसलिए ये कह रहा हु ,क्युकी ऑरिगनल घोड़े की नाल का छल्ला बनाने के लिय आपको उस घोड़े की नाल चाहिए होगी ,जो घोड़ा पहले तो काला हो , और  दूसरा जरूरी बात चलते हुय घोड़े की नाल निकाल जाए अपने आप , वही ही घोड़े की नाल असली माना जाता हे और वही नाल असरदार होती हे |
अगर आपको खुद मिल जाए चलते हुय घोड़े का नाल , तब आप उसे लोहार के पास उसे पीटकर बनवा ले , और पहन ले | तब आपको वो फायदा कर जाएगा ,और उससे BEST कुछ भी नहीं होगा | 

नाव की कील का क्या महत्व है: नाव की कील के फायदे 

अब बात करते हे naav ki keel ka challa benefits अब आपको पता ही हे की घोड़े की नाल मिलन इतना आसान नहीं हे , तो आप को दूसरा ऑप्शन चुन लेना चाहिए और वो हे नाव की कील , ये भी इतनी आसानी से तो नहीं मिलेगा , लेकिन ये हे की ये आपको जहा नाव चलती हे वहा मिल जाएगा , और वो भी ऑरिगनेल | बस आपको करना क्या हे ,आपको अगर उस जगह के आस पास रहते हे जहा नाव चलती हे ,लकड़ी वाली छोटी नाव आप वह जाइए और वह नाव वाले से पूछिए एक नाव की कील चाहिए और वो भी पुरानी नाव की कील जो नाव कबाड़ मे रखी हो ,आप उस नाव की कील मांगना ,मिल जाएगी उनके पास पुरानी नाव होती हे , और उस नाव की कील वो लोग रख लेते हे ,उनको भी पता हे इसका महत्व | कील लेकर आप उन्हे कुछ पेसे दे देना ,अपनी क्षद्धा अनुसार |

आब आपको करना ये हे की शनिवार से पहले आप किसी सुनार को वो कील दे दो और उससे कह दो की ये नाव की कील का छल्ला बना दो ,और ये भी कहे दो की आप इसे बिना आग के गर्म कीये बिना बनाना हे , मतलब बिना heat कीय हुय |
मतलब की आप नाव की कील हो या घोड़े की नाल की कील हो आपको सिर्फ पीट पीट कर छल्ला बनाना हे , अगर आप उसको आग मे डाल कर तब उसको पीटकर छल्ला बनाओगे तो उसका असर कम हो जायगा ,और वो उतना असर नहीं करेगा |

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नाव की कील के फायदे :Naav Ki Keel Ka Challa Benefits

नाव की कील के फायदे बहुत हे , कहने का मतलब ये हे की आप अगर कोई रत्न खरीदते हो तो एक तो वो इतने महंगे होते की आपका खरीदना मुस्किल हो जाता हे , दूसरा उसका फायदे के साथ साथ नुकसान भी होना तये  हे , क्युकी कभी रत्न गलत या कभी कुंडली देखने वाला पन्डिट गलत , तो कभी रत्न आपको सूट नहीं किया तो दिक्कत | जो फायदा एक नीलम रत्न आपको देता हे न उसी तरह नाव की कील आपको फायदा पहुचाती हे , नीलम आपको नुकसान भी पहुचा सकती हे ,लेकिन नाव की कील आपको नुकसान नहीं पहुचाती |

तो यह बात हो रही हे नाव की कील के छल्ला की , जिसका सीधा संबंध शनि महाराज से , मतलब हम शनिदेव का आशीर्वाद के लिय इस छल्ले को पहनते  हे | जिसके कुंडली मे शनिदेव नाराज हे , जो शनिदेव के सारेसाती से परेशान हे , उनके लिय तो ये वरदान हे |
सीधा स मतलब ये हे की आपको अगर नीलम जेसे रत्न का फायदा उठाना और आप नीलम पहनने से डरते हे या उतने पेसे नहीं हे नीलम पहनने के तो आपको नाव की कील का छल्ला बनवा कर पहन लेना चाहिए |

नाव की कील की अंगूठी किस उंगली पर पहनते हैं :

नाव की कील को बनवा कर अब आपको शुक्रवार को घोड़े की नाल का छल्ला को लाकर कच्चा दूध , शहद ,गंगाजल मिश्रण मे रात भर डाल कर छोड़ दे , शनिवार की सुबह नहा धोकर छल्ले को गंगाजल मे दुबारा धोकर ,छल्ला को धूप और दिया दिखा कर फिर  शनिदेव के  बीज मंत्र- ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः  का 108 बार जाप करके, सीधे हाथ की बीच वाली उंगली मे पहन लेना चाहिए |

सावधानी- शनिदेव के छल्ले के साथ तांबे का छल्ला नहीं पहनना चाहिए | 

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